साँसों की माला पे मैं दिन रात तुझको जपता
|| sanso ki mala pe men din raat tujhko japta ||
|| ek tu sachcha tera naam sachcha ||
साँसों की माला पे मैं दिन रात तुझको जपता
आदि पुरख निरंजन तेरी, वंदना मैं करता।
साँसों की माला पे, मैं दिन रात तुझको जपता।।
तेरा उजाला मुझ तक, हर वक्त आ रहा है
तेरा ख्याल मुझको, जैसे महका रहा है।
कलयुग में तो ये काया, पाप का रथ है
हे पारब्रह्म तेरा,नाम ही एक सत है।
माथे के मेहराब में, एक चिराग जल रहा है
वो साया बनके मेरे ,संग संग चल रहा है।
लाखों ब्रह्ममाण्ड तूने, हे परमात्मा बनाए
अहसान तेरे कितने, कोई भी गिन ना पाए।
जब आँख बन्द करता, तेरी कुदरत दिखाई देवे
तेरी सुगन्ध मुझको, महकाती दिखाई देवे ।
मेरा जिस्म सीप है एक, और तू है इसका मोती
तू है अगम उजाला और, मैं हूँ तेरी ज्योति।
क्या माँगू तुझसे हे प्रभ, तूने सब दे दिया है
तेरी आरती में जलता,मेरी आत्मा का दिया है।
खुले आसमा के नीचे, आराधना मैं करता
'तेरे उजाले से मैं, हृदय को अपने भरता।
संसार सपने जैसा, और मैं हूँ एक साया
मैं तेरी महिमा गाने, कुछ दिन को जग में आया।
संसार के सागर में, तूफान उठते रहते
लेकिन मेरे प्रभ तुम मुझपे, साया किये रहते।
फुलसन्दे वाले बाबा, बैठे हैं सर झुकाए
मुझको तो हर किसी में, तेरी कुदरत नजर आये।
लेखक एवं गायक :-सतपुरुष बाबा फुलसंदे

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