बैठा हूँ तेरी याद में लेके तेरा चाँदना।
गुज़रे है मेरी आँखों से तारों का कारवाँ ।।
वो भी क्या लोग थे जो हदों से गुज़र गये
उफ तलक करी नहीं मुश्किलों से गुजर गये ।।
वो कौन था जिसे उम्र भर हम दूंडते रहे
दिल की अंधेरी गलियों में जिसे ढूंडते रहे ।।
हुजरे में दिल के इक चिराग मुददत से जलता है
ये किसका साया है जो मेरे साथ चलता है।।
ना मैं मंदिर जाऊँ ना काबे को जाता
मेरा सनम है मेरे दिल में उसको सीस निवाता,
फूल रोज चढ़ाता ।।
खुद में नहीं वो दीखता वेद पढ़ा तो क्या पढ़ा
इन्सानों से प्यार नहीं यज्ञ करा तो क्या करा।।
निकला था तुझको ढूँडने टकरा गया मैं खुद से
देखा जो खुद को गौर से तो जा मिला मैं तुझसे ।।
मैं फकीर हँ वो बादशा कैसे निभेगी उससे
किस बुरे वक्त में हुई है दोस्ती मेरी उससे ।।
अ नरगिसे मस्ताना तुझे कुछ खबर भी है
संभल के चल यहाँ पर मेरा सर भी है।।
सच्चाई का सिंगार करके मैंने साहिब रिझाये
सच के रास्ते में मैंने साजन अपने पाये।।
परमात्मा के साथ चल सुन अ मेरी आत्मा।
जिसने उसको पा लिया शान्त हुई वो आत्मा
फुलसन्दे वाले बाबा कहें जो प्यार प्रभ का हासिल है
और जरूरत कुछ नहीं सब कुछ तुझको हासिल है।।
स्वर एवं रचित by सत्पुरुष बाबा फुल्संदे वाले


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