परमेश्वर भी क्या कभी करता है अविचार ।
जो वो करता उसमें ही होता जीव का उद्धार ||
उसके राज्य में भला अविचार कहाँ ।
जो भी वो करता मंगल होता सदा यहाँ ।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहते जीव उसकी महिमा ना जाने ।
अंधा आदमी सूरज के बारे में क्या जाने |
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जिसने करी तेरी स्तुति तेरी रोशनी से भर गया
जिसने करी तेरी स्तुति तेरी रोशनी से भर गया ।
बनके सुनहरा पंछी वो तेरी तरफ को उड़ गया । ।
ओम - ओम कहने से परमात्मा मिलता नहीं
अल्ला-अल्ला करने से वो अल्ला मिलता नहीं
वो तो उस दिल में बैठा है जो रोशनी से भर गया ।
केवल दिखावा करने से कोई महान होता नहीं
झूठे लोगों पे परमात्मा मेहेरबान होता नहीं
जो उसकी दुनियाँ की सेवा करे वो तो उसी का हो गया ।
सबमें समाया हुआ है वो फिर भी अलग वो सबसे है ।
जिसने उठाया पर्दा दिल का दीदार उसको हो गया ।।
संसार जब बना ना था वो उस वक्त से मेरा महबूब है।
दुनियाँ का क्या है कुछ कहे मैं उसका वो मेरा हो गया । ।
तेरी रोशनी मेरे हमनशीं मुझे दीखे है हर एक में ।
मेरी नजर में है तू ही तू जब से पर्दा गुरू ने उठा दिया । ।
हर किसी को ये नसीब नहीं मिले प्याला उसके हाथ से ।
साकी तेरा चश्मे करम जाने कैसे मुझपे हो गया । ।
मेरी आत्मा सिंगार कर मिलना है उस दिलदार से ।
ढलने लगी है शाम अब उजाला भी कम हो गया । ।
मृत्यु का देवता मेरा मित्र करता है मेरा इन्तजार ।
उसको भी मेरी गलियों से कुछ प्यार जैसा हो गया । ।
मेरे परमात्मा दो जहान का सुल्तान है तू ही फ़क़त ।
मैं झुका हूँ तेरे सामने मैं गुलाम तेरा हो गया ।।
मेरे सतगुरू मेरे शहन्शा तेरे जैसा कोई भी नहीं ।
मेरा दिल तो कूड़ा कबाड़ था जिसे तूने गुलशन कर दिया ।।
फुलसन्दे वाले बाबा तुम बैठे हो किस ख़्याल में ।
यादों में किसकी तुम्हारा सर बैठे-बैठे झुक गया । ।
ek tu sachcha tera naam sachcha
स्वर एवं रचना प्रभु सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वाले
संकलन :देव पुत्र रवि

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