सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

रहता है सामने तू फिर भी नज़र ना आये ek tu sachcha tera naam sachcha

दोहा  

जीव जो जो इच्छा करे यदि वो उसको मिल जाये।

तो इसका जीवन ही उल्टा पुल्टा हो जाये॥

सब कामनाऐं परमात्मा पूरी नहीं करता।

इस तरहा वह जीव पर अपना अनुग्रह करता।

फुलसन्दे वाले बाबा कहते प्रभ सदा किरपा करता|

जीव बालक की तरहा हाथपैर फेंका करता॥


भजन यहाँ से शुरू होता है


रहता है सामने त फिर भी नजर ना आये।

परमात्मा ये तू है या तेरी रोशनी के साये ।।

कोई कितना ही हो रोशन अंधेरों से गुजरना होगा।

चढ़ता हुआ सूरज भी समन्दर में उतर जाये ।।

क्यों मन्त्र हजारों जपे बस एक हरफ जपले ।

जिसने जपा है एक को वो रोशनी से भर जाये ।।

पढ़ पढ़ किताबें सूरत हो गई जल्लादों जैसी।

है बात बस ज़रा सी वो भी समझ ना आये ।।

गाड़ी भरी किताबें नहीं पार लगा सकती।

गुरू हाथ जो सिर पे धरे हर एक पर्दा खुल जाये ।।

उठ रात की तन्हाई में कर जिक अपने रब का ।

फिर देखना के सीना रोशन तेरा हो जाये ।।

उस एक से दो चार हुए फिर लाख करोड़ हुए।

बस बात ये है एक ही किसी को समझ ना आये ।।

मृत्यु के बाद दुर्गम घाटी से गुजरना होगा।

उस वक्त कौन सा अमल सोच तेरे काम आये ।।

जब तक नहीं मुहब्बत तेरे दिल में सुन ले ।

तू दूर-दूर प्रभ से करम झकोले खाये ।।

चाहे चारों वेद पढ़ले या सारा कुरान रटले

जो नही मिठास दिल में नहीं रोशनी तू पाये ।।

इक बीज रब के इश्क का दिल की जमीं पे गाढ दे।

गुरू हाथ पकड़े तेरा प्रभ के महल ले जाये ।।

फुलसन्दे वाले बाबा कहते है, गौर से सुन।

जब तक गुरू ना धोवे बदबू ना तुझसे जाये ।।

स्वर एवं शब्द रचना :प्रभु सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वाले

संकलन :देव पुत्र रवि


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