सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

आँसू-ek tu sachcha tera naam sachcha

 

  एक तू सच्चा तेरा नाम  सच्चा  

आँसू

सतपुरूष बाबा फुलसन्दे वाले कहते हैउत्तम विचार और महान चरित्र ही परम धन है। व्यवहार में पछपात नही करना चाहिए। व्यवहार धर्म  से भी महान होता है। बल्कि आचरण को ही व्यवहार कहा जाता है।


एक ईष्यालू व्यक्ति भगवान महावीर को तरह तरह से परेशान किया करता था, वह उनकी तपस्या को कभी ढोंग बताता था तो कभी कहता कि अहिंसा से कहीं अपराधों को रोका जा सकता है। उन पर तरह तरह की फबतियां कसता किन्तु भगवान महावीर को कभी क्रोध नही आता था। एक दिन व्यक्ति हाथ जोड़कर बोलामैं आपके साथ र्दुव्यवहार करता हूँ किन्तु आप पर कोई प्रभाव नही पड़ता आप कैसे सहन कर लेते हैं? भगवान  महावीर की आँखों से आँसू बहने लगे वह व्यक्ति आश्चर्य मैं पड़ गया और उनकी ओर देखने लगा भगवान महावीर बोले-प्रिय ! तुम्हारे

द्वारा किये गये र्दुव्यवहार से मेरी आँखों में कभी आँसू नहीं आये किन्तु जब मैंने सोचा कि तुम्हे अपने बुरे बरताब के कारण कैसे कैसे दण्ड़ भोगने  पड़ेंगें तो मेरा हृदय भर आया तुम्हे होनै वाले कष्ट की पीड़ा ने आज मुझे रूला दिया।

उस व्यक्ति का हृदय तत्काल ही बदल गया। उसने किसी से भी र्दुव्यवहार न करने का संकल्प लिया।

इस कहानी से शिक्षा मिलती है –कि दूसरों के साथ किया गया व्यवहार ही पुन: हमें प्राप्त होता है।



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