गिरते हुए जब मैने तेरा नाम लिया है ।
गिरने ना दिया तूने वहीं थाम लिया है ।।
हैरान हूँ मेरे मुँह से ये किसका नाम निकल गया ।
मुझे गिरता हुआ देखके जमाना संभल गया ।।
मैं गमो की धूप में जब तेरा नाम लेके निकला ।
बादल का एक टुकड़ा करने को साया निकला ।।
दिल सुनके तेरा नाम धड़कता है अदब से ।
तेरी गली में पैर भी रखता हूँ तो अदब से ।।
हालांकि तुझे आँख से देखा भी नहीं है ।
पर दूर हो तू मुझसे ऐसा भी नहीं है ।।
तेरी नशे निगाह ने दीवाना कर दिया ।
रिन्दों ने यूं ही मुफत में इल्जाम लिया है ।।
जिसको देखो वो नज़र आता है दीवाना तेरा ।
वाह क्या अन्दाज़ है अ पीरे मयखाना तेरा ।।
तेरी आँखों के मयकदे से झूमते जाते हैं लोग ।
हर तरफ एक शोर है अ यार जानाना तेरा ।।
तेरे हरजाई पने की सब जगहा पे धूम है ।
अ सनम मुश्किल से मुश्किल है पता पाना तेरा ।।
दैर में ढूंडा ना पाया और ना काबे में मिला । ___
दैर में ढूंडा ना पाया और ना काबे में मिला । ___
ठोकरें खिलवा रहा है यार याराना तेरा ।।
दिल भी लेलो जाँ भी लेलो सर भी हाज़िर है मेरा ।
इससे आगे और बतला क्या है नज़राना तेरा ।।
वो मिल ना सके याद तो है उनकी सलामत ।
इस याद से भी हमने बड़ा काम लिया है ।।
तेरी याद है दारू दवा तेरी याद है मेरी बंदगी ।
तेरे दर पे मेरा सर झुका के तू बक्श दे मेरी बंदगी ।
तेरे दर पे सर झुकाके मुझको सकू ऐसे हुआ ।
रोती रही मेरी जिन्दगी होती रही तेरी बंदगी ।।
जाहिद मेरी तकदीर में दरे यार की थीं ज़ियारतें ।
सर को पाए यार पे रख होती रही मेरी बंदगी ।।
मरते दम तक तेरी याद दिल से ना गई।
हम मट्टी में मिल गये मगर तेरी रोशनी ना गई ।।
मुझे सख्त मुश्किलों में मिली तुमसे तसल्ली ।
हर मोड़ पे घबराके तेरा नाम लिया है ।।
तूफानो ने कुछ भी कमी ना डुबाने में छोड़ी।
वो तो डूबते को तुमने संभाल लिया है ।।
तुम रूठ गये हर खुशी गम में बदल गई ।
घर के चिराग ने ही घर तमाम किया है ।।
आया है लौटके वही फिर गर्दिशे जमाना ।
बुलबुल ने फूंक डाला अपना ही आशियाना ।।
मेरे सर पे साया रब का है मुझे बिजलियों का डर नहीं ।
मुझे ख़ौफ़ आतिशे गुल से है कहीं ये चमन को जला ना दे ।।
उस रब के इश्क की दौलत यूं ही नहीं मिलती ।
फरिश्तों को भी इस इश्क ने बदनाम किया है ।।
हस्ती तो मिट गई मगर तेरी रोशनी वही है ।
इस रोशनी में रूह ने आराम किया है ।।
मीरा ने जहर का प्याला हंस हंस के पी लिया ।
कुछ ना कहा किसी से होठों को सी लिया ।।
प्रहलाद को हिरणाकुश ने तलवार से कटवाया, कटा नहीं ।
खौलते तेल में गिरवाया, जला नहीं
पहाड़ से फिकवाया, मरा नहीं ।
हाथी के आगे फिंकवाया, मरा नहीं ।
जहर दिलवाया, पर मरा नहीं
होलका की गोद में आग में बैठाया, पर जला नहीं ।
लोहे का खम्ब सुर्ख गरम करवाया.
उससे लिपटाया, कुछ हुआ नहीं ।
नरसिंह भगवान प्रकट हुए कहा-
मुझे माफ करना, मुझे आने में देर हो गई ।
इस लिये तेरी तकलीफ़ कुछ ज्यादा ही बढ़ गई ।
गिरते हुए जब मैने तेरा नाम लिया है।
हंस हंस के ज़ख्म दोस्तों ने हमें दिये ।
हर चोट पे हमने कलेजा थाम लिया है ।।
मैं प्यासे का प्यासा रहा समन्दर था सामने ।
ऐसा भी गमे यार ने अहसान किया है ।।
ठुकराओ या चाहे हमें सीने से लगालो ।
हमने तो तुम्हें अपना खुदा मान लिया है ।।
क्या उसको मिटाएंगे ज़माने के हवादिश ।
जिसने तेरा दामाने करम थाम लिया है ।।
अ शैख ना कर बादाकसों को तू नसीहत ।
जन्नत को छोड़ यार का दर थाम लिया है ।।
बस दो कदम पे गोरे गरीबाँ है दोस्तो ।
जग छोड़ के अब मुल्के अदम थाम लिया है ।।
हमने ना तेरे जैसा कोई देखा जहान में ।
जब भी गिरा मैं तूने मुझे थाम लिया है ।।
फुलसन्दे वाले बाबा मुझे देखके बोले ।
तेरा बोझ हमने हाथों पे थाम लिया है ।।
गिरते हुए जब मैने तेरा नाम लिया है ।
मंज़िल ने वहीं बढ़के मुझे थाम लिया है ।।
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2 Comments
ek tu sachcha tera naam sachca
ReplyDeleteएक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है