हे कोटी कोटी ब्रह्माण्ड के नायक मेरे पापों को क्षमा कर दे
दुःख संताप से तपते हुए मेरे तन मन को तू शान्ति दे
तुम हो पार ब्रहम परमेश्वर पाप खण्डन अगम ईश्वर
हे कोटि कोटि .,.........
हे दुःख भजन अलख निरंजन देवी देवता करे तेरा सुमरन
हे कोटि कोटि .......
जो भी तेरी अस्तुति गावे वो साहिव तेरा दास कहावे
फुलसन्दे से ये आवाज आवै गुरू बिन सब जग नरक को जावे
हे कोटि कोटि .......
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क्या कहूँ आपने क्या दिया हे मुझे जिन्दगी देके उलझा दिया है
मुझे कभी धूल कभी कांटे दामन में भरे मुझे जाने केसा ये गम दिया है
मुझे जिन्दगी देके उलझा .......
जिस तरफ भी देखूँ में उस सिम्त अधेंरा हे इतना मजबूर क्यों कर दिया हे
मुझे जिन्दगी देके उलझा ......
अ मसीहा ये क्या दे दिया हे मुझे हँस हँस के जहर दे दिया है
मुझे जिन्दगी देके उलझा .......
मुझको फुलसन्दे लाके दफन करना तुम मेरे सतगुरू ने भी लिख दिया है
मुझे जिन्दगी देके उलझा .......


1 Comments
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है