#Aradhna आराधना पद्धति... कैसे करें आराधना? एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
आराधना
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
नाम लेते ही हुआ परगट, परमेश्वर निरंकार |
देखने वाले देख रहे हैं तेरा उजियार ।।
जो दुनियाँ में खप रहे, फिरेंगे होके ख्वार
।
अन्त काल शरमाऐंगे, साहिब के दरबार ।।
खड़े गगन में देवता, खुला धरम का द्वार |
पहुँचने वाले पहुँच गये, भव सागर के पार |
भव सागर में भटके बेड़ा, उठे लाख भँवर पटार ।
जहाँ- जहाँ मेरा गुरू फिरे, तहाँ-तहाँ उजियार।।
गुरू संग कीजै आराधना, गुरू सत की जोत
निरंकार |
जहाँ-जहाँ मेरा गुरू फिरे, तहाँ-तहाँ उजियार ।।
अलख निरंजन.....
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
तू मालिक सारे जग का, सच्चा तेरा नाम ।
जिस दिल में तेरा चाँदना, वो जग में सुल्तान
।।
पन्थ और ग्रन्थ अनेक जगत में, गुरू बिन मुक्ति ना
होय ।
गुरू सुमर हर पाइए, तेरा फेर ना मरना होय
।।
कैसे करूँ तेरी आराधना, साहिब सिरजनहार |
बन्दे को इतना बहुत, पड़ा रहे दरबार ।।
देवी बड़ी ना देवता, ना पैगम्बर पीर।
सबसे ऊँचा तख्त तेरा, एक तू ही अव्वल आखीर
।।
गगन गुम्बद से चाँदना, आवे है दिन रात।
आरती करें तेरी देवता, उजयारा लिए हाथ ।।
कोई किसी का है नहीं, मैंने छान लिया
संसार |
तीन लोक तलक तेरा, कोई नहीं रोवनहार ।।
सब मतलब के मीत जगत में, नहीं कोई बेगरजी।
जो तेरा फटा कलेजा सीवै, नहीं ऐसा कोई दर्जी
।।
फटा चीथड़ा सन्त पहनै, ओ तेरी नाम चदरिया।
जिस चदरी के नीचे ठिकाना, पावै सारी दुनियाँ
।।
काले हरफ मत लिखै..... दिल का वरका कर
साफ।
दिल दरगाह में अलख निरंजन, वो तो राजों का
महाराज ।।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
जहाँ......आता है । सम्मान के वास्ते
दोनों हाथों से होठों को आँखों व मस्तक को चूमें । श्लोक पढने के बाद में
प्रार्थना पढ़े।
प्रार्थना
हे परमेश्वर ! तू जमीन आसमान और रूहों का
स्वामी है,
कौन है जो तेरी बराबरी कर सके, कोई नहीं है,
तेरे प्रकाश में देवता और फ़रिश्ते तेरी
आराधना
में मस्त हुए झूमते हैं उस प्रकाश की एक
बूंद
तू हमें बख्श, हमें अपने करीब कर, हमारा नाम
अपनी पवित्र आत्माओं में लिख, हमें अंधेरे से
निकाल कर उजाले और रोशनी में ला, जो बीमार हैं
उन पर रहम कर, जो दुखी लाचार हैं
उन पर रहम कर,
अपने भले बुरों पर तू रहम कर, तेरा रहम हम पर होवे,
तेरा प्रकाश हमारे साथ हो,
हे परमेश्वर तू हमें अपनी ज्योति में
विश्राम दे,
जो तेरे रास्ते पर आये हैं उनके वास्ते
अपना रास्ता आसान कर,
दुख भोग का प्याला हमारे सामने से हटा दे,
हे परमेश्वर ! दुखों के बन में भटकती हुई
आत्माओं का शान्ति दे।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा, बाकी बचे ना कोय ।
तू रहे तेरा नाम रहे, नहीं और रहेगा कोय
।।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा, सब में तेरा नूर
समाया ।
मेहर कर मैं तेरा बन्दा, तेरी चौखट पे आया ।
मेरा सच्चा सतगुरू साँचा शाह है, करम की रेख मिटावे ।
भव अँधयार से पार करके, ज्योति जोत समावे।।
जीवन और मौत के घाट हैं दो, जहाँ तेरी जोत बले ।
जहाँ कोई ना संग चले, वहाँ तू ही संग -संग
चले ।।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा,
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ।
इसके बाद बैठकर माला से मन में गुरू मंत्र एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा, का जाप करें, एक माला पूरी होने के बाद बोलें- हे परमेश्वर ! तू हमें अपनी ज्योति में विश्राम दे। हर घण्टे की आराधना में शुरू में केवल प्रार्थना व एक माला सुमरन होता है।
अरदास
करे गरीब तेरी आराधना, जग के तारनहार |
तुझे अर्पण तेरी आत्मा, बख्शो बख्शनहार ।।
आद पुरख परमेश्वर, तू ज्योति निरंकार |
सब में तेरा चाँदना, सब में तेरा उजियार
।।
आरती करें तेरी देवता, दोनों हाथ पसार ।
सिद्ध मुनि करें स्तुति, उठे अनहद झन्कार ||
जगमग होवै चाँदना, जोत अनन्त अपार ।
ओंकार और निरंकार में, लगा तेरा दरबार ।।
सत के सिंहासन पे विराजे, साहिब सिरजनहार ।
दिल के हुजरे में मुझे, तेरा घड़ी-घड़ी
दीदार |
व्याकुल दुखी मेरी आत्मा, खिण-खिण करे पुकार ।
सतगुरू जहाज चढ़ाय के, भव से करियो पार ।।
अगम सिन्ध समन्द तुम, हम तेरी लहर पटार ।
कहे गरीब.......तेरा, कहे ये संत.......तेरा,
तुम ही लगाओ पार ||
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
अरदास पढ़ने के बाद मंत्र बोले जाते हैं।
रात्रि के दो बजे व शाम के सूर्यास्त के समय । अरदास के बाद आरती करें। आरती जोत
जला कर करें।
आरती
निरंकार पारब्रह्म परमेश्वर की
हे निरंकार प्रभु परमेश्वर ! तेरी जगमग
होवे आरती।
जल थल सब में तेरा चाँदना, कैसी जगमग होवे
आरती।।
पानी पवन अगन आकाशा चँवर डुलावें झुकायें
माथा।
ब्रह्मा विष्णु और महादेवा सीस झुकाये
करैं तेरी सेवा ।। हे...
सिद्ध मुनि खड़े अस्तुति करते छत्तर छाँव
धरम राज करते।
चाँद सूरज बने दीपक बाती, हाथ जोड़ खड़ी लख
चौरासी ।। हे...
अगम अगोचर हे अविनाशी, जोत निरंजन घट घट
वासी।
तेरा अन्त ना कोई पावे,कोई तेरी स्तुति
कैसे गावे ।
जो मन में तेरी जोत जगावे वो साहिब तेरा
दास कहावे ।
दास ....कहे है तेरा, संत... कहे है तेरा
करियो पार प्रभु मेरा बेड़ा ।। हे निंरकार
प्रभु....
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा-
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ।
आरती सच्चे गुरू की
सच्चे गुरू की आरती करिये,
सुमर सुमर भव पार उतरिये ।।
पाँच तत्व गुण तीन से पारा ।
जहाँ मेरे साहिब का दरबारा ।।
सुमिरन ज्योति सीस पे धरिये ।
साँस-साँस पे नाम सुमरिये ।।
गुरू की करिये हर दम पूजा ।
गुरू समान कोई देवे ना दूजा ।।
हरि और गुरू एक कर जाने ।
घट-घट भीतर एक पछाने ।।
सतगुरू ब्रह्म रूप धर आये ।
अलख अगम घट में दरसाये ।।
मिटा अंधेरा हुआ उजियारा |
सतगुरू मेरा तारन हारा ।।
एक जोत का सकल पसारा |
सतगुरू संत.... पुकारा ।।
सतगुरू देव की आरती करिये ।
आरती करिये नाम सुमरिये ।।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा,
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ।
यह मंत्र आरती व आराधना के बाद में पढ़े
जाते हैं
जोत निरजन, ओंकार, निरंकार, सोहंग, सतनाम,
अन्तहीन तुझे परणाम ।
“एक तू सच्चा तेरा
नामसच्चा"
ॐ अग्नि मीले पुरोहितम, यज्ञस्य देवं ऋतविजं
होतारं रत्न धातमम् ।
“एकतू सच्चा तेरा नाम
सच्चा'
ऊँ भूभुर्वः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यम्, भर्गो देवस्य धीमहि,धियो यो नः
प्रचोदयात् ।
“एक तू सच्चा तेरा
नाम सच्चा"
ऊँ विश्वानि देव, सवितु दुरितानि परासुव, यद् भद्रं तन्न आसुव
।
"एक तू सच्चा तेरा
नाम सच्चा"
ॐ त्रयम्बकम् यजामहे, सुगन्धिम पुष्टि वर्धनम, उर्वारूकमिव
बन्धनान् मृो मुक्षीय मामृतात् । “एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा"
ॐ यदंग दाशुषे, त्वमग्ने भद्रं
करिष्यसि, तवे तत् सत्यम् अंगिरः |
"एकतू सच्चा तेरा नाम
सच्चा"
ॐ शन्नो मित्रः शन्न् वरूणः शन्नो
भवर्त्यमा शन्न इन्द्रो बृहस्पतिः शन्नो विष्णु रू- रूकमः । । “एक तू सच्चा तेरा
नाम सच्चा
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
बोल निरंकार परमेश्वर की जय,
बोल स्वामी जी महाराज की जय,
बोल मुक्तिदाता सतपुरूष बाबा फुलसन्दे
वालों की जय,
बोल सच्चे दरबार की जय,
बोल देव भूमि भारतवर्ष की जय ।
"एक तू सच्चा तेरा
नाम सच्चा'
आराधना होने के बाद दुआ, प्रार्थना व एक माला का सुमरन इसमें आप प्रार्थना से पहले यह शब्द पढ़े ।
जो जीवात्माएँ नरक लोक में,मृत्यु लोक में या
अन्य लोकों में दुख भोग रही हैं
तथा जो दुखी लाचार और बीमार हैं और जो लोग
पाप व अधर्म के मार्ग में भटक रहे हैं
उनके वास्ते प्रार्थना और सुमरन का ये
उजाला हम अर्पित करते हैं।
माला पूरी होने के बाद में बोलें- हे
परमेश्वर तू हमें अपनी ज्योति में विश्राम दे |
माला के बाद बोलें
सच्चा नूर तेरा नाम है मालिक, ये दुनियाँ है ठीकरी
।
सच्चे मोती के बराबर, कभी ना होवे ठीकरी
।।
तैंतीस करोड देवता करते तेरी आराधना।
दोनों हाथ पसार के, मैं माँगू तेरा
चाँदना।।
ॐ त्रयम्बकम् यजामहे, सुगन्धिम् पुष्टि
वर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनान मृण्मुक्षीय मामृतात्
।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
फिर गुरू वाणी का एक छोटा सा वचन पढ़े
जो
अगली आराधना तक याद रहे ।
वचन हर आराधना के बाद अवश्य पढ़ें।
सतपुरूष बाबा फुलसन्दे वाले कहते हैं
गुरू बिन माला फेरते गुरू बिन करते दान ।
गुरू बिन सब निष्फल जावे कहते वेद पुराण
।।
या इसके अतिरिक्त ये बचन भी बोल सकते हैं
परमेश्वर सबर करने वालों के साथ है ।
-देवो भूत्वा देवं यजेत्–
देवता बनकर परमेश्वर
की आराधना करो
पशु भूत्वा ना विचरेत्–
पशु ब्न कर मत भटकते
फिरो |
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
लेखक एवं गायक :प्रभु सत्प्रुष बाबा फुल्संदे वाले


4 Comments
Ek tu sachcha tera naam sachcha
ReplyDeletegoood parmeshwar hame theek kare or hame atma se tapsvi or sarir se ek senik banabe ek tu sachcha tera naaam sachcha
ReplyDeleteEk tu saccha tera naam saccha
ReplyDeleteek tu sachcha tera naam sachcha
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है