कागज की नाव
कागज की नाव सागर का पानी ।
तेरी मेरी ऐसी जिन्दगानी ।।
रात दिन पंछी के दो पंख,
कभी पतझड़ कभी आये बसन्त ।
सुख दुख आते और चले जाते ,
जाने वाले कभी नहीं आते।।
सागर किनारे चाँदनी रातें,
तेरे मेरे प्यार की बातें।
तुम मुझे बुलाओ और मैं ना आउँ,
आकाश में पंछी बन के उड़ जाऊँ।।
दुनियाँ के दाग दिल पे ऐसे पड़े हैं,
आँखों में काँटे जैसे टूटे पड़े हैं।
प्यासे के हाथों में दो बूंद पानी,
जीवन की बस इतनी सी कहानी।।
फुलसन्दे वाले बाबा कहते,
ख्वाबों के पंछी तो उड़ते रहते ।।
ek tu sachcha tera naam sachcha
satpurush baba fulsande wale

1 Comments
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है