सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले
सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

पिंजरे के पंछी को एक दिन उड़ जाना है pijare ke panchi ko ek din ud jana hai ek tu sachcha tera naam sachcha

 पिंजरे के पंछी को एक दिन उड़ जाना है

पिंजरे के पंछी को एक दिन उड़ जाना है।

 जब तक है चमन में तेरे तब तक आबो दाना है।।

कोई मोती चुगता है कोई टेंकर चुगता है

किसी ने जलाया दिया तो किसी ने बुझाना है।। 

कोई लाख जतन करले कोई लाख चतुर बन ले 

कर्मो में जो लिख दिया बस वो ही पाना है।।

काया का महल एक दिन सूना हो जाएगा

पाप और पुण्य ही बस तेरे संग संग जाना है ।। 

माटी के पुतलों तुम्हें अभिमान नहीं अच्छा 

दो चार ही बूंदों में गल के गिर जाना है।।

कभी दिन कभी रात बड़ी 

कभी सुख कभी दुख की घड़ी

दरया के पानी को बहते चले जाना है।। 

जो शरण तेरी आया वो तेरा कहलाया 

जो मंत्र जपे तेरा भव पार लग जाना है।।

नर में नारायण है कण कण में नारायण है

गुरू चरणों पे जाके गिरे तो दरवाजा खुल जाना है।।

 काया में शबद बाजे साधो अनहद गाजे 

तू ध्यान लगा के देख दर्शन मिल जाना है।।

वो देश अजब हमारा जहाँ झमके उजयारा

 मनमुख जावे नहीं गुरूमुख ही जाना है।। 

कहें फुलसन्दे वाले बाबा तेरे सिर पे रहे छावा 

गुरू चरणों में ध्यान लगा दरवाजा खुल जाना है।।

गायक एमव लेखक :सतपुरुष बाबा फुलसन्दे बाले 



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