दिल यार का शैदाई दिल यार का दीवाना
दिल यार का शैदाई दिल यार का दीवाना
वो सनम भी है खुदा भी है वो शम्मा मैं परवाना।
पीता हूँ निगाहों से शीशा है ना पैमाना
हर सिम्त तू ही तू है काबा है ना बुतखाना।
आते ही उसके महफिल में आलम ये हो गया है
शीशे पे गिरा शीशा पैमाने पे पैमाना।
जाहिद मेरी किस्मत में सज्दे है इसी दर के
छूटा है ना छूटेगा संगे दरे जानाना।
साकी तेरे दम से है आबाद ये मयखाना
तू रौनके काबा है तू जीनते बुतखाना।
तेरा नाम लेते ही दिल में हो गई है रोशनी
तुम हुस्न के मालिक हो मैं हुस्न का दीवाना।
क्यों आँख मिलाई थी क्यों अपना बनाया था
अब रूख को छुपा बैठे करके मुझे दीवाना।
मंजिल मेरे मकसद की काबा है ना बुतखाना
इन दोनों से आगे चल अ हिम्मते मर्दाना।
बेखुद किये देते है अंदाजे हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ अ जल्वा-ए जानाना।
काबे की सियाह पोशी करती है पुकार हर –दम
कहते हो जिसे काबा वो भी है सनम खाना।
अ दो जहाँ के मालिक कहाँ जाके तुझको ढूँढूं
तू मुझमें है मैं तुझ में अ जल्वाए जानाना।
इतनी सी मेहेर करना अ नरगिसे मस्ताना
जब जान लबों पे हो तुम सामने आ जाना।
फुलसन्दे वाले बाबा जब आसमां पे पहुँचे
आवाज ये आई फरिश्तों ये है मेरा दीवाना।
ek tu sachcha tera naam sachcha
lekhak :satpurush baba fulsande wale

1 Comments
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
ReplyDeleteआपका हम स्वागत करते है