जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है
जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है
पत्थर हर सख्श ने हाथों में उठा रखा है।
माला जपता हूँ तेरी सज्दे करता हूँ तुझे
मैने अ यार तेरा नाम खुदा रखा है।
पत्थरों आज मेरे सर पे बरसते क्यों हो
मैने तुमको भी कभी अपना खुदा रखा है।
ना परिन्दा ना फरिश्ता ना सितारा हूँ मैं
फिर भी आसमान को घर मैने बना रखा है।
जिक होठों पे तेरा दिल में तेरी सूरत है
मैने माथे पे तेरा नाम लिखा रखा है।
मुझको मंदिर या मस्जिद से गरज क्या है
मैने दरे यार पे सर अपना झुका रखा है।
दरो दीवार से आवाज तेरी आती है।
मैने हर साँस में तुमको ही बसा रखा है।
जिसको छूता हूँ वो गुल शाख़ से गिर जाता है
कैसा गुलशन मेरे रब तूने बना रखा है।
जल रहा हूँ मैं दुख की अग्नि में
पर तेरी याद को सीने से लगा रखा है।
दर्द तूने दिया तू ही दवा है मेरी
मैने तो सर को तेरे आगे झुका रखा है।
जख्म दुनियाँ ने दिये तूने अपना नूर दिया।
मुझको सीने से फ़रिश्तों ने लगा रखा है।
जाने किस रस्ते से आ जावे वो महबूब मेरा
मैनें हर रस्ते पे फूलों को बिछा रखा है।
ek tu sachcha tera naam sachcha
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
लेखक एवं गायक :सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले

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